
नई दिल्ली | 13 जुलाई 2026
मलाला दिवस के अवसर पर एडवोकेट पीयूष पंडित, संस्थापक एवं अध्यक्ष पीयूष ग्रुप, संस्थापक न्यासी स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट (SBP) तथा ई-विलेज – विश्व का प्रथम स्मार्ट मेट्रो विलेज के संस्थापक ने मलाला यूसुफज़ई सहित उन सभी शिक्षकों, अभिभावकों, समाजसेवियों एवं युवा नेतृत्वकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो प्रत्येक बच्चे के शिक्षा के अधिकार के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, समानता, न्याय, मानवीय गरिमा और सतत विकास की आधारशिला है। कोई भी राष्ट्र तब तक वास्तविक अर्थों में विकसित नहीं हो सकता, जब तक प्रत्येक बच्चे को—चाहे उसका लिंग, धर्म, जाति, भाषा, भौगोलिक स्थिति या आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो—सुरक्षित, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध न हो।
एडवोकेट पीयूष पंडित ने कहा कि भारत का संविधान अपने उद्देशिका (Preamble) में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों को स्थापित करता है। साथ ही अनुच्छेद 21(क) (Article 21A) प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि संविधान के ये आदर्श ऐसे भारत के निर्माण की प्रेरणा देते हैं, जहाँ प्रत्येक बच्चा सम्मान के साथ शिक्षा प्राप्त करे और प्रत्येक बालिका अपने सपनों को साकार कर सके।
उन्होंने बताया कि पीयूष ग्रुप, स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट (SBP) तथा ई-विलेज – विश्व का प्रथम स्मार्ट मेट्रो विलेज के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा नवाचार आधारित सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उनका मानना है कि बालिकाओं की शिक्षा और युवाओं का सशक्तिकरण किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण नींव है।
उन्होंने कहा कि आज भी विश्व के अनेक हिस्सों में गरीबी, संघर्ष, बाल श्रम, असमानता, जलवायु परिवर्तन तथा डिजिटल असमानता के कारण करोड़ों बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल सरकारें नहीं कर सकतीं, बल्कि इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, उद्योग जगत, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक की साझी भागीदारी आवश्यक है।
मलाला दिवस के अवसर पर एडवोकेट पीयूष पंडित ने विश्व के नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, युवा नेतृत्वकर्ताओं और सामाजिक संगठनों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक बच्चे के लिए समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु सामूहिक प्रयास करें, ताकि गरीबी, लिंग, दिव्यांगता या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा, “शिक्षा चरित्र का निर्माण करती है, समाज को सशक्त बनाती है, लोकतंत्र को मजबूत करती है और स्थायी शांति की आधारशिला रखती है। जब हम एक बालिका को शिक्षित करते हैं तो एक परिवार को सशक्त बनाते हैं, और जब हम प्रत्येक बच्चे को शिक्षित करते हैं तो एक सशक्त भारत और बेहतर विश्व का निर्माण करते हैं।”
उन्होंने “जय हिंद” के उद्घोष के साथ “वसुधैव कुटुम्बकम् – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” का संदेश देते हुए शिक्षा के माध्यम से वैश्विक शांति, समानता और मानवता को सशक्त बनाने का आह्वान किया।


