“जब तक सनातन सुरक्षित है, तब तक संविधान भी सुरक्षित है” – पीयूष पंडित
रघुराज प्रताप सिंह “राजा भैया” को लेकर इन दिनों देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बने राजा भैया के हालिया बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीयूष पंडित खुलकर राजा भैया के समर्थन में सामने आए हैं।
पीयूष पंडित ने एक विस्तृत वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि राजा भैया द्वारा दिया गया भाषण “अक्षरशः सत्य” है और वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता भी। उन्होंने कहा कि राजा भैया ने किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक जड़ों, सनातन परंपरा और संविधान के बीच गहरे संबंध को समझाने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि राजा भैया का यह कथन कि “जितने मुस्लिम आज हैं, पहले हिंदू ही थे” ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों में देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक द्वेष की दृष्टि से। भारत की सभ्यता हजारों वर्षों से विविधताओं को स्वीकार करती आई है और सनातन संस्कृति ने हमेशा सबको साथ लेकर चलने का संदेश दिया है।
पीयूष पंडित ने कहा कि कुछ विरोधी तत्व और सोशल मीडिया पर सक्रिय संगठित समूह राजा भैया के बयान को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजा भैया ने कहीं भी संविधान विरोधी बात नहीं कही, बल्कि उनका आशय यह था कि भारत की सनातन परंपरा ही वह आधार है जिसने संविधान के मूल्यों — समानता, सहिष्णुता, कर्तव्य और राष्ट्र सर्वोपरि की भावना — को जीवित रखा है।
उन्होंने कहा —
“राजा भैया ने संविधान को हटाने या कमजोर करने की बात कभी नहीं कही। उनके वक्तव्य का वास्तविक आशय यह था कि यदि भारत की सनातन संस्कृति कमजोर होगी, तो भविष्य में ऐसी शक्तियां मजबूत हो सकती हैं जो संविधान का वही सम्मान न करें जो सनातन विचारधारा से प्रेरित समाज करता आया है।”
पीयूष पंडित ने यह भी कहा कि राजा भैया केवल किसी एक वर्ग या जाति के नेता नहीं हैं, बल्कि वे सर्वसमाज के लोकप्रिय नेता हैं। उन्होंने कहा कि कुंडा और आसपास के क्षेत्रों में राजा भैया ने वर्षों से दलित, पिछड़ा, किसान, गरीब और सवर्ण समाज सभी के लिए कार्य किया है।उन्होंने कहा —
“राजा भैया दलितों के मसीहा, पिछड़ा समाज के संरक्षक और सवर्ण समाज की आन-बान-शान हैं। उन्होंने हमेशा समाज को जोड़ने की राजनीति की है। कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए उनके बयान को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।”
जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में राजा भैया की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए पीयूष पंडित ने कहा कि आज देश में ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो बिना भय के अपनी बात रखें और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए खुलकर बोलें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही अभद्र टिप्पणियों और व्यक्तिगत हमलों की भी निंदा की। उन्होंने युवाओं और आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग भारतीय संस्कृति के विरुद्ध है।पीयूष पंडित ने कहा —
“भारत संवाद, सहिष्णुता और विचारों के आदान-प्रदान की भूमि है। असहमति हो सकती है, लेकिन मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए। सोशल मीडिया पर जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह समाज को बांटने का कार्य कर रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट राष्ट्रहित, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक समरसता के लिए लगातार कार्य करता रहेगा तथा उन सभी व्यक्तित्वों का समर्थन करेगा जो भारतीय सभ्यता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में आवाज उठाते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद देशभर में राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। एक ओर जहां विपक्षी दल राजा भैया के बयान की आलोचना कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में भी सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
जारीकर्ता:
मीडिया प्रकोष्ठ
स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट
संपर्क:
पीयूष पंडित
राष्ट्रीय अध्यक्ष, स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट
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