
नई दिल्ली | 29 जुलाई, 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) देश की मुद्रा प्रणाली को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। प्लास्टिक (पॉलिमर) नोटों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिससे नकली नोटों पर अंकुश लगाने, नोटों की आयु बढ़ाने और रखरखाव की लागत कम करने में सहायता मिल सकती है।
पॉलिमर नोट पारंपरिक कागज़ी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत, जलरोधक और टिकाऊ होते हैं। इनमें अत्याधुनिक सुरक्षा विशेषताएँ शामिल की जा सकती हैं, जिससे जालसाजी की संभावना और भी कम हो जाती है। साथ ही, इन नोटों का लंबे समय तक उपयोग संभव होने से बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता भी कम होगी।
दुनिया के कई देशों ने पहले ही पॉलिमर मुद्रा को सफलतापूर्वक अपनाया है और उसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। भारत में भी इस दिशा में उठाया जा रहा यह कदम देश की वित्तीय प्रणाली को भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
यदि यह योजना व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो इससे देश की मुद्रा व्यवस्था अधिक सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की डिजिटल और आर्थिक प्रगति के साथ-साथ नकदी प्रबंधन प्रणाली को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।


