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सदन में गरजे कुंडा विधायक राजा भैया, मुद्दों की बरसात — “जनता का दर्द सुना, सरकार ने माना”

सदन में गरजे कुंडा विधायक राजा भैया, मुद्दों की बरसात — “जनता का दर्द सुना, सरकार ने माना”

''कौन सी बात कहां कैसे कही जाती है...ये सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है - राजा भैया"

ब्यूरो प्रतापगढ़। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुँवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया ने जमीन और जनता से जुड़े मुद्दों को बेहद सधे अंदाज़ में सदन के पटल पर रखा। कम समय में अधिकतम बात कहने की उनकी शैली ने न केवल सरकार बल्कि सदन में बैठे विधायकों को भी प्रभावित किया — समर्थन में मेज थपथपाती आवाज़ें गूंजती रहीं।
अपने संबोधन की शुरुआत में राजा भइया ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि अब संगठित अपराध पूरी तरह समाप्त हो चुका है। व्यक्तिगत रंजिश में होने वाली घटनाओं पर भी पुलिस की त्वरित कार्रवाई अपराधियों को हतोत्साहित कर रही है। उनके इस बयान को सदन में सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की स्वीकृति के रूप में देखा गया।
राजा भइया ने स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि अभी विधायक निधि से केवल असाध्य रोगों — दिल, गुर्दा, कैंसर, मूत्र व अस्थि रोग — के इलाज में ही धन मिल पाता है, जबकि सड़क दुर्घटनाओं व अन्य गंभीर बीमारियों के पीड़ित वंचित रह जाते हैं। उन्होंने सदन में एक महत्वपूर्ण मांग उठाई कि नियम से “असाध्य” शब्द हटाया जाए, ताकि हर जरूरतमंद का इलाज संभव हो सके।
उन्होंने आयुष्मान योजना में राशन कार्ड की 6 यूनिट सीमा पर सवाल उठाते हुए कहा आज के समय में “पति-पत्नी और चार बच्चे” वाला मानक व्यावहारिक नहीं है। इससे पात्र परिवार लाभ से वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने बिंदुवार सुधार की मांग कर योजना को अधिक वास्तविक और उपयोगी बनाने पर बल दिया।
राजा भइया ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि
गंगा एक्सप्रेस-वे, राम वन गमन मार्ग और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण के दौरान भारी वाहनों से ग्रामीण सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं हो रही।
जल जीवन मिशन पर सीधी मांग
उन्होंने जल शक्ति मंत्री को संबोधित करते हुए कहा आधे से ज्यादा पानी की टंकियां अधूरी,पाइपलाइन खुदाई से सड़कें टूटी। कई जगह सप्लाई शुरू नहीं मजाकिया लहजे में बोले
“जैसे एक विधायक को जन्मदिन से पहले काम पूरा करने का निर्देश मिला था, वैसे ही मंत्री जी को भी आदेश दे दीजिए कि अगले जन्मदिन से पहले जल जीवन मिशन पूरा करा दें।”
संवेदनशील सरकार का जिक्र
राजा भइया ने एक चर्चित फिल्म विवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार की संवेदनशीलता गांव-गांव तक चर्चा में है, जिससे जनता में भरोसा पैदा हुआ है।
उन्होंने वसीम बरेलवी के लिखे एक शेर के साथ खत्म किया संबोधन
”कौन सी बात कहां कैसे कही जाती है…ये सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है।।”
राजा भइया के भाषण के बाद सदन में मेज थपथपाकर समर्थन जताया गया और एक बार फिर यह साबित हुआ कि जब मुद्दे जनता के हों, तो राजनीति से ऊपर सहमति बन जाती है।

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