Rashtriya Lakshya: Online News Portal

पीयूष समूह के 20वें स्थापना दिवस पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण – ‘डिजिटल सिविलाइज़ेशन 2050’ और ‘राइज़ एंड फॉल’ के माध्यम से भविष्य, तकनीक और जीवन के संघर्षों पर नई वैचारिक पहल

नई दिल्ली, 27 जुलाई 2026।

पीयूष समूह कंपनियों एवं ट्रस्ट के 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण साहित्यिक एवं वैचारिक पहल के रूप में दो नई पुस्तकों का भव्य लोकार्पण किया गया। ये पुस्तकें ‘डिजिटल सिविलाइज़ेशन 2050’ और ‘राइज़ एंड फॉल’ हैं, जिन्हें पीयूष समूह की वैचारिक दृष्टि, अनुभव और भविष्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।

पुस्तक लोकार्पण समारोह में भारत एवं विदेशों से आए शिक्षाविदों, उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नेतृत्वकर्ताओं, अतिथियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। स्थापना दिवस जैसे ऐतिहासिक अवसर पर इन पुस्तकों का विमोचन पीयूष समूह की इस सोच को दर्शाता है कि संस्थागत विकास के साथ वैचारिक और बौद्धिक विकास भी समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है।

‘डिजिटल सिविलाइज़ेशन 2050’ — भविष्य की सभ्यता पर विमर्श

‘डिजिटल सिविलाइज़ेशन 2050’ भविष्य की उस दुनिया पर विचार प्रस्तुत करने का प्रयास है, जहां तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षा, स्वचालन, ज्ञान और मानवीय संबंध समाज के स्वरूप को तेजी से बदल रहे हैं।

पुस्तक का मूल प्रश्न यह है कि आने वाले दशकों में तकनीकी प्रगति के साथ मानवता, नैतिकता, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी को कैसे सुरक्षित रखा जाए। यह पुस्तक विशेष रूप से युवाओं, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और भविष्य की दिशा पर विचार करने वाले पाठकों के लिए महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत करती है।

‘राइज़ एंड फॉल’ — संघर्ष, सफलता और पुनःउत्थान की कहानी

दूसरी पुस्तक ‘राइज़ एंड फॉल’ जीवन में आने वाली सफलता, असफलता, उतार-चढ़ाव और पुनःउत्थान की मानवीय यात्रा को केंद्र में रखती है।

पुस्तक का संदेश है कि गिरना अंत नहीं है। कठिन परिस्थितियां व्यक्ति को तोड़ने के बजाय उसे अधिक मजबूत, अनुभवी और उद्देश्यपूर्ण बनने का अवसर दे सकती हैं। यह पुस्तक संघर्ष से सीख लेकर पुनः आगे बढ़ने और जीवन को सकारात्मक दिशा देने की प्रेरणा प्रदान करती है।

पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर अधिवक्ता पीयूष पंडित ने कहा:

“संस्थाएं केवल भवनों और परियोजनाओं से नहीं बनतीं; विचारों से बनती हैं। हमारा प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसे विचार और साहित्य प्रस्तुत किए जाएं जो उन्हें भविष्य को समझने, चुनौतियों का सामना करने और बेहतर समाज बनाने के लिए प्रेरित करें।”

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार, शिक्षा, मानवीय मूल्यों और दूरदर्शी सोच का भी लक्ष्य है। इन पुस्तकों को इसी वैचारिक यात्रा की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

पीयूष समूह के 20वें स्थापना दिवस पर हुआ यह संयुक्त पुस्तक लोकार्पण संगठन की व्यवसाय से विचार, विचार से सेवा और सेवा से सामाजिक परिवर्तन की यात्रा को एक नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।

दो पुस्तकें, दो दृष्टियां — भविष्य को समझने और जीवन को नए अर्थ देने की पहल।

ज्ञान • चिंतन • संघर्ष • नवाचार • मानवता • विकसित भारत 2047 🇮🇳

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *