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“जनसंख्या नहीं, मानव संसाधन का सशक्त विकास ही विकसित भारत और विश्व का भविष्य है”

 

 

 

नई दिल्ली | 12 जुलाई 2026

विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर एडवोकेट पीयूष पंडित, संस्थापक एवं अध्यक्ष पीयूष ग्रुप, संस्थापक न्यासी स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट (SBP) तथा ई-विलेज (विश्व का प्रथम स्मार्ट मेट्रो विलेज) के संस्थापक ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या केवल एक चुनौती नहीं, बल्कि उचित शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, तकनीक और सतत विकास के माध्यम से इसे राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति में बदला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है। यह स्थिति एक ओर अपार संभावनाएँ प्रदान करती है, वहीं दूसरी ओर रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ जल, पर्यावरण संरक्षण, खाद्य सुरक्षा, आवास, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी सामने लाती है। ये चुनौतियाँ केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्व के अनेक देशों के लिए भी चिंता का विषय हैं।

पीयूष ग्रुप, स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट (SBP) तथा ई-विलेज – विश्व का प्रथम स्मार्ट मेट्रो विलेज के माध्यम से समाज में जनजागरूकता अभियान निरंतर चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य सतत विकास, डिजिटल सशक्तिकरण, महिला उद्यमिता, कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, हरित ऊर्जा, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करना है।

एडवोकेट पीयूष पंडित ने कहा कि यदि ग्रामीण भारत को आधुनिक सुविधाओं, डिजिटल तकनीक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाए, तो महानगरों पर बढ़ता दबाव कम किया जा सकता है और संतुलित विकास का नया मॉडल स्थापित किया जा सकता है। इसी सोच के साथ ई-विलेज परियोजना स्मार्ट, हरित, आत्मनिर्भर और समावेशी ग्रामीण विकास का एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

उन्होंने विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं से आह्वान किया कि वे जनसंख्या को बोझ नहीं, बल्कि मानव पूंजी के रूप में विकसित करने की दिशा में मिलकर कार्य करें। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से ही एक समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत का निर्माण संभव है।

“विकसित भारत का मार्ग केवल बढ़ती जनसंख्या से नहीं, बल्कि शिक्षित, स्वस्थ, कुशल, जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों से होकर गुजरता है।”

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