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  • September 19, 2026
  • Last Update August 17, 2026 6:43 am

टॉपर लिस्ट में ‘खेल’?: 97.6% वाली छात्रा बाहर, बराबर अंक वालों को ताज

ब्यूरो प्रतापगढ़। सीबीएसई बोर्ड हाईस्कूल रिजल्ट के बाद जारी जिला टॉपर लिस्ट पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बराबर अंक लाने के बावजूद एक ग्रामीण क्षेत्र की छात्रा को सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि अन्य छात्रों को उसी अंक पर संयुक्त टॉपर घोषित किया गया। इसे लेकर स्कूल प्रबंधन ने सीधे तौर पर भेदभाव का आरोप लगाया है।
मामला बाबा ब्रजेश सिंह मेमोरियल इंटरनेशनल स्कूल, बिहार की छात्रा आर्या पांडेय का है। आर्या ने 97.6% अंक हासिल किए—यानी उतने ही, जितने अंक पाने वाले छात्रों को टॉपर लिस्ट में जगह दी गई। इसके बावजूद उसका नाम सूची से गायब है।
स्कूल प्रबंधक शिवम सिंह और प्राचार्य आलोक ओझा ने इसे “चयनात्मक न्याय” बताते हुए सवाल दागे हैं—क्या टॉपर बनने का पैमाना अलग-अलग है? अगर नहीं, तो फिर आर्या को बाहर क्यों रखा गया? उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाते हुए कहा कि यह सीधी-सीधी प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि भेदभाव का मामला दिखता है।
विद्यालय प्रबंधन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि तुरंत टॉपर लिस्ट में संशोधन कर आर्या पांडेय को संयुक्त टॉपर घोषित नहीं किया गया, तो वे मामले को उच्च स्तर तक ले जाएंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक छात्रा की बात नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं के सम्मान का मुद्दा है।
इस घटनाक्रम से छात्रा के अभिभावकों और शिक्षकों में भी आक्रोश है। उनका कहना है कि मेहनत और मेरिट के साथ ऐसा व्यवहार न सिर्फ अन्याय है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है।
वहीं, स्कूल ने अपने मेधावी छात्रों का सम्मान जरूर किया, लेकिन पूरे कार्यक्रम पर इसी विवाद की छाया रही।
अब सवाल सीधा है—क्या सिस्टम अपनी गलती सुधारेगा या ‘टॉपर’ भी अब सिफारिश और चयन का खेल बनकर रह जाएगा?