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ऑस्ट्रेलियन समाजसेवी रोशनी लाल का व्यक्तिगत इंटरव्यू

हर हफ्ते की तरह आज की सख्शियत अन्य लोगो से अलग हैं, अथाह प्रेम भारत से ,फिजी से और कर्मभूमि ऑस्ट्रेलिया से तीनो देशों से जड़ें जुड़ी हैं, हज़ारों संघर्षों के बाद खुद को स्थापित कर समाज और परिवार को सौ फीसदी देते हुए आज हमारे साथ खास बातचीत के कुछ अंश आपके सामने है । नमस्कार रोशनी जी स्वागत है आपका सख्शियत कार्यक्रम में

धन्यवाद आपको व समाचार पत्र को आपने मुझे इस योग्य समझा कि भारत की एक सख्शियत के रूप में मैं अपना साक्षात्कार दे रही हूं आपके प्रतिष्ठित समाचार पत्र में

बचपन के बारे में बताएं हर व्यक्ति के जीवन मे यह अनूठा काल होता कहाँ जन्म हुआ उस देश के बारे में विस्तारपूर्वक बताएं,व शिक्षा कहाँ से हुई आपकी ?

जन्म स्थान फिजी है एक प्यारा से देश है पूरा बचपन यही माँ के पास बीता जो बहुत सी यादों के साथ भरा है कुछ खट्टी कुछ मीठी यादों के साथ बचपन से ही संघर्षों में पली बढ़ी रही बात शिक्षा की तो बुलीलेका सनातन धर्म कॉलेज लबासा से हुई । फ़िजी जो कि आधिकारिक रूप से फ़िजी द्वीप समूह गणराज्य के नाम से जाना जाता है, दक्षिण प्रशान्त महासागर के मेलानेशिया में एक द्वीप देश है।

फिजी के पहले निवासियों का आगमन यूरोपीय अन्वेषकों से बहुत पहले ही हो गया था जो की सत्राहवें शताब्दी मे फिजी आये थे। मिट्टी के बर्तनों की खुदाई से पता चलता है कि 1000 ई.पू के आसपास भी फिजी में निवासी रहा करते थे, हालांकि अभी भी उनके फिजी प्रवास के विषय में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। डच अन्वेषक हाबिल टैस्मान सन् 173 में जब दक्षिणी महाद्वीप की तलाश में निकले थे तब उन्होनें फिजी का दौरा किया था। उन्नीसवीं सदी तक यूरोपीय स्थायी रूप से द्वीप पर नहीं बसे थे। ब्रिटेन ने इस द्वीप को अपने नियंत्रण में लेकर इसे अपना एक उपनिवेश बना लिया। ब्रिटिश लोग भारतीय मजदूरों को यहां ठेके पर गन्ने के खेतों में काम करने के लिये ले आये।

शायद इन्हीं में मेरे पूर्वज भी भारत से फिजी आये और बसे जल्दी ही मैं आपको भारत मे अपने परिवार की पूर्ण सूचना दूंगी
सन् 1960 में इस देश को ब्रिटेन ने स्वतंत्रता दी। सन् 1949 में देश का लोकतांत्रिक शासन दो सैन्य विद्रोहों से बाधित हुआ क्योंकि पहले तख्तापलट में ऐसा माना गया कि तत्कालीन सरकार में भारतीय फ़ीजियों का प्रभुत्व था तथा दूसरे में ब्रिटिश राजशाही और गवर्नर जनरल की जगह एक गैर कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति हुई। इसके बाद देश का नाम परिवर्तित करके ‘फिजी गणराज्य’ कर दिया गया (1949 में इसे बदलकर फ़िजी द्वीप समूह गणराज्य कर दिया गया)। इस तख्तापलट के कारण भारतीयों ने बडी संख्या में देश छोड़ दिया जिसके परिणामस्वरूप मेलानेशियन्स का बहुमत हो गया। 1990 में नए संविधान के द्वारा राजनीतिक व्यवस्था मे मूल फ़ीजी लोगों के वर्चस्व को स्थापित किया गया।

रंगभेद विरोधी समूह (GARD) का गठन एकतरफा थोपे गये संविधान का विरोध करने और 1970 के संविधान की बहाली के लिये किया गया। 1987 के तख्तापलट को अन्जाम देने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल सितिवेनी रेबूका नए संविधान के तहत हुये चुनाव के बाद 1992 में प्रधानमंत्री बने। तीन साल बाद, सितिवेनी रेबूका ने संविधान समीक्षा आयोग की स्थापना की, जिसके फलस्वरूप 1997 में एक नया संविधान अस्तित्व में आया साथ ही इस संविधान को फ़ीजी भारतीय और फ़ीजी स्वदेशी समुदायों के नेताओं का समर्थन भी मिला। फिजी को एक बार फिर से राष्ट्रमंडल के एक राष्ट्र के रूप में सवीकृति मिल गयी। नई सहस्राब्दी में देश ने फिर ने फिर से एक तख्तापलट देखा।

इस तख्तापलट में जॉर्ज स्पीट ने तत्कालीन प्रधान मंत्री महेंद्र चौधरी, की सरकार को उखाड़ फेंका जो 1997 के संविधान के बाद निर्वाचित हुयी थी। कमोडोर फ्रैंक बैनीमरामा ने राष्ट्रपति मारा के इस्तीफे जो संभवतः मजबूर मे दिया गया था के बाद कार्यकारी शक्ति ग्रहण कर लीं। सन 2000 में सुवा की महारानी एलिजाबेथ बैरकों में हुऐ दो सैनिक विद्रोहों ने फिजी को हिला कर रख दिया जब विद्रोही सैनिकों ने शहर में हुड़दंग मचा दिया। उच्च न्यायालय ने संविधान की बहाली का आदेश दिया और, सितंबर 2001 में, लोकतंत्र को बहाल करने के लिए आम चुनाव आयोजित किये गये, जो अंतरिम प्रधानमंत्री लेसीनिया करासे की सोकोसोको दुआवाता नी लेवेनिवानुआ पार्टी ने जीते। सन् 2005 में, बहुत विवादों के बीच, करासे सरकार ने एकता आयोग बनाने का एक प्रस्ताव रखा जिसके अन्तर्गत सन 2000 के तख्तापलट के पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के साथ इसके उत्तरदायी लोगों के लिए माफी की सिफारिश की गयी थी। इस प्रस्ताव का सेना और विशेष रूप से सेना के कमांडर फ्रैंक बैनीमारामा ने पुरजोर विरोध किया। फ्रैंक बैनीमारामा ने आलोचकों के साथ सहमति जताई कि वर्तमान सरकार के समर्थकों जिन्होने तख्तापलट में एक निर्णायक भूमिका निभाई को क्षमा दान देना अनुचित है। उन्होंने सरकार पर अपने हमले मई से जुलाई तक लगातार जारी रखे जिसके कारण उनके संबंध सरकार से जो पहले से तनावपूर्ण थे और तनावपूर्ण हो गये।

नवम्बर 2006 के अंत और दिसम्बर, 2006 के शुरू में, तख्तापलट फ़ीजी d’ état के लिये बैनीमारामा मुख्य रूप से उत्तरदायी था। बैनीमारामा ने अपनी मांगों की सूची करासे सरकार को सोंप दी जिसके बाद करासे सरकार संसद में एक विधेयक लेकर आयी जिसमे 2000 में तख्तापलट के प्रयास मे शामिल लोगों को क्षमादान देने की पेशकश की गयी थी। उस ने करासे को 4 दिसम्बर तक इन मांगों को स्वीकार करने या अपने पद से इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दे दिया। वहीं करासे ने मागों को स्वीकार करने और इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया।

5 दिसम्बर को राष्ट्रपति रातु जोसेफा इलोइलो, जिन्होंने बैनीमारामा से मुलाकात के बाद संसद भंग करने के एक कानूनी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये। अपने आकार के हिसाब से, फिजी का सशस्त्र बलों का बेड़ा काफी बड़ा है और संयुक्त राष्ट्र के दुनिया के विभिन्न भागों में चल रहे शांति अभियानों में इसने प्रमुख योगदान दिया है। इसके अलावा, इराक में 2003 के अमेरिकी नेतृत्व वाले आक्रमण के बाद इसके कई भूतपूर्व सैनिक इराक के सुरक्षा क्षेत्र की सेवा में तैनात हैं।

प्रश्न : हर व्यक्ति के जीवन मे उतार चढ़ाव आता है पढ़ाई के बाद आपके जीवन मे कुछ यादगार पल जिसे आप हमारे पाठकों से कहना चाहें ?

उतार चढ़ाव जीवन का एक पहलू है । मेरा भी जीवन अछूता नही जब मैं सिर्फ 6 साल की थी पिता जी परिवार को छोड़ स्वर्ग सिधार गए ऐसी स्थिति में माँ ही घर की मुखिया के रूप में बचपन में दिखी , मुझे याद है माँ मेरी फिजी में अनेकों काम करती थी कि उसके बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो सके । मां की आंखों में कभी हार नही देखी वो योद्धा है वह अपने परिवार की रखवाली करने वाली एक सुपर वूमेन है। मुझे गर्व है मैं भी उनके इस जीवन काल मे उनका हाथ सिर्फ 6 साल की उम्र से बताने लगी धीरे धीरे संघर्षों के बादल छटे और उम्मीद की रोशनी परिवार पर आई और हम माँ के साथ खड़े हुए सभी की पढ़ाई हुई सबने अपने अपने क्षेत्रों में अलग पहचान बनाई मैं मां के सबसे अधिक नजदीक रही उनके संघर्षों को महसूस किया यही वजह है मैं आज भी अपनी माँ की रोशनी हूँ । उनके साथ फिजी नही मैं ऑस्रेलिया हूँ पर हर दिन हर पल साये की तरह माँ के साथ मैं और मेरे साथ माँ की आहट है । मैंने उतार चढ़ाव से न घबराना माँ से ही सीखा उसी ने काम कोई भी हो ईमानदारी से करने की सीख दी एक समय था मैं दूध बेचती थी हमारे तरफ अध्यापकों की सोसाइटी थी । गाय के दूध घर घर पहुंचाती थी । माँ हमेशा कहती थी दूसरों को इज्जत दो तुम्हे भी इज्जत मिलेगी । मुझे याद है माँ ने शादी के समय भी यही सीख दी कि शादी के बाद लड़कियां पराई हो जाती हैं उनका घर उनके पति का ही घर होता है वहां सुख मिले य दुख जिंदगी वही गुजारनी होती है ।उनकी ही सीख की बदौलत आज मैं एक परिवार से जुड़ी हुई हूँ और एक प्राउड फेमिली मेंबर हूँ । बस माँ की एक बात नही मानी वो यह कि लड़कियां कभी मां के लिए पराई नही होती मैं आज भी मां की सेवा निस्वार्थ भाव से कर रही हूं और आजीवन करूंगी आज अगर मैं कुछ हूँ । तो उन्ही की सीख व उन्ही के संघर्षों का नतीजा है ।

प्रश्न : सोशल मीडिया के माध्यम से पता चलता है आप सनातन धर्म मे प्रगाढ़ विश्वास रखती हैं कोई विशेष वजह ?

जैसा मैंने ऊपर बताया है कि मेरी माँ भारत मे पैदा हुई हम एक हिन्दू सनातन परिवार से हैं। फिजी में हिन्दू समाज काफी ज्यादा है हमने अपने धर्म को बचपन से जिया है देखा है और मानते हैं । इन्हीं वजह से भारत से ही गुरु दीक्षा ली और हर साल प्रयास होता है कि हम सनातन धर्म के ज्यादा से ज्यादा करीब पहुंचे इसी वजह से से हर वर्ष भारत भ्रमण परिवार सहित करती हूं । भगवान शंकर में मैं विशेष आस्था रखती हूं । प्रयागराज में आनंद गिरी जी महाराज जी से मैं धार्मिक रूप से एक शिष्य के रूप में जुड़ी हूँ । मैं सनातन धर्म को एक अनूठा धर्म मानती हूं जिस धर्म मे हर एक धर्म को सम्मान मिलता है । हर त्योहार हर धार्मिक कार्यक्रम हम उल्लास के साथ मनाते हैं व हर यात्रा को हम अपने कैमरों में कैद करते हैं जो शोशल मीडिया के माध्यम से आम जनमानस तक पहुँचता है । जिससे हमारे धर्म के महत्व को अन्य लोग भी समझते हैं जिससे मुझे व्यक्तिगत रूप से खुशी मिलती है ।

प्रश्न : आप फिजी में जन्मी ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत है इस स्थिति में भारत को कहां पाती हैं!

फिजी जन्मभूमि है वही जन्म हुआ वही पली बढ़ी वही से शिक्षा प्राप्त की य यूँ कहूँ शारीरिक सरंचना की पूर्णता फिजी से प्राप्त हुई पर बौद्धिक ज्ञान माँ से प्राप्त हुआ यानी माँ जीवन की प्रथम गुरु है अतः मां का जन्म भारत मे हुआ उनके ज्ञान और उनके उपदेश में भारतीयता और सनातन धर्म का तेज जो मेरी शरीर को पवित्र विचारों और बौद्धिक क्षमता अच्छे बुरे की पहचान व कभी न हार मानने वाला मंत्र प्रदान करता है । इसे आप कुछ इस तरह समझ सकते हैं जन्मक्षेत्र फिजी है कर्मक्षेत्र ऑस्ट्रेलिया और धर्म क्षेत्र भारत है । शरीर फिजी हृदय ऑस्ट्रेलिया और आत्मा का स्थान भारत है । मैं काफी उत्साहित होती हूँ जब यह पाती हूँ कि तीनों देशों में मुझे बहुत सम्मान मिला इसलिये मैं तीनो देशों को एक जैसे ही देखती हूँ य सनातन धर्म की तरफ से सोचूं तो पूरा विश्व ही एक परिवार है । वसुधैव कुटुंबकम् —हम बिना भेदभाव के संम्पूर्ण पृथ्वी को एक परिवार के समान समझते हैं ।यह मेरा है अथवा पराया है ऐसा केवल छोटे दिल वाले ही सोचते हैं । उदार दिल वालों के लिए तो सारी पृथ्वी ही एक परिवार की तरह है।

संकीर्ण मानसिकता वाले लोग ही अपने पराए में भेद रखतें हैं।उदार मानसिकता वाले लोग तो सबको अपना ही समझते हैं ।
ऊंच ,नीच ,तेरा ,मेरा ऐसी भावना उनके चित्त में नहीं आती।

प्रश्न : आपने अपने जीवन मे बहुत पद प्रतिष्ठा प्राप्त की अब आगे क्या योजना है?

मैं जीवन को लेकर बहुत उदारवादी हूँ,ज्यादा दिखावे की जिंदगी नही जीती हूँ, पर पीड़ा को अपनी पीड़ा समझती हूं , धैर्यवान हूँ, स्वयं के लिए सदैव ईमानदार हूँ और आगे भी रहूंगी । अभी तक जो भी प्राप्त हुआ सब भगवान शंकर की कृपा व मेरे कर्मो व मां के आशीर्वाद से ही सम्भव हुआ । आगे की योजनाओं में बस सेवानीति है । जीवन मे कुछ लोगो को अच्छा दे सकूँ अपने प्रयासों से यही आगे की योजना है ।

*प्रश्न : हाल ही में भारत के विभिन्न राज्यों में आपका जन्मदिन मनाया गया जिसकी थीम *उम्मीदों की रोशनी* थी क्या कहना चाहेगी क्या है ये प्रोजेक्ट?

हाल ही में मैं स्वर्ण भारत परिवार नामक एक भारतीय ट्रस्ट से जुड़ी हालांकि बहुत महीनों से मैं उनके कार्यों को देखती रहती थी एकाएक उनके द्वारा निवेदन किया गया कि ट्रस्ट में आप संरक्षक के रुप मे व ट्रस्टी के रूप में जुड़िये मुझे अच्छा लगा उनका प्रस्ताव मैं जुड़ी उसी के फलस्वरूप जन्मदिवस पर मेरे नाम के अनुसार उम्मीदों की रोशनी कार्यक्रम का आगाज किया जो हर वर्ष दिव्यांग बच्चो को को समर्पित एक कार्यक्रम होगा । जल्द ही प्रोजेक्ट की सभी जानकारी मीडिया द्वारा आमजनमानस तक प्रेषित की जायेगी ।

प्रश्न : हर व्यक्ति सभी जिम्मेदारियों को पूर्ण करके अपनी राह पर चलने की ख्वाहिश होती है आप क्या सोचती हैं

पहली बात तो जीवन मे जिमेदारियों को कभी पूर्ण नही किया जा सकता क्योंकि विचार में जगत कल्याण की भावना है पर फिर भी अंत समय बस एक उद्देश्य है अध्यात्म और सेवानीति

प्रश्न : अब परिवार के बारे में पाठकों को कुछ बताएं, पति और परिवार के सदस्यों के बारे में कुछ बताएं

पति और एक बेटे के साथ एक ड्रीम हाउस में मैं हूँ एक छोटा व सुसज्जित परिवार हैं । जहां हम सभी अपने अपने उद्देश्यों की ओर अग्रसर हैं । मुझे अपने परिवार पर गर्व है । साथ ही अन्य परिवार के लोग कहीं भी किसी भी देश मे हैं मैं सदैव उनके संपर्क में रहकर हाल खबर लेती रहती हूं । मैं पूर्ण रुप से एक पारिवारिक माहिला की दृष्टि से स्वयं को देखती हूँ ।

प्रश्न : माता जी आपके जीवन मे महत्वपूर्ण हैं , क्या कहना चाहेगी अपने परिवार के लिए

परिवार की वजह से ही आज है , और कल ,परसों भी , मां की वजह से ही है । मां ने ताकत दी , मां ने साहस दिया य यूँ कहूँ ज्ञान सम्मान सुरक्षा एकता इन सबका पाठ मां ने दिया और उपर्यक्त प्रश्नों में मां के बारे में विस्तृत रूप से बता चुकी हूं ।

प्रश्न : ऑस्ट्रेलिया जैसे देश मे रहकर भारतीय परंपरा को जीवित रखती हैं कैसे परिवार, प्रोफ़ेशन और सामाजिक कार्यों को एक साथ आप पूर्ण कर लेती हैं

जैसा कि आत्मा से मैं सनातनी हूँ । तो धर्म के प्रति संजीदा हूँ पूरी धरती हमारा परिवार और भारत धरती का हृदय इसी मान्यता के साथ जिंदगी जी रही हूं और फिजी ऑस्ट्रेलिया हर जगह बैलेंस है । जिंदगी का फलसफा एक है सभी धर्म एक हैं सबकी एक सलाह है इंसानियत इसी वजह से मैं अपने उद्देश्यों में सफल हूँ ।परिवार को पूर्ण महत्व देती हूं आज भी सुबह उठकर पूजा पाठ के बाद परिवार के लोगो की व्यवस्था देखती हूँ फिर कर्मक्षेत्र की ओर प्रस्थान करती हूं यही वजह है सब कुशल है ।

अंत मे हमारे पाठकों को क्या संदेश देना चाहती हैं ।

ज्ञान सम्मान सुरक्षा एकता इन्ही चतुर्थ स्तम्भो पर जीवन है इन्हीं को कर्म क्षेत्र मानकर जिये वह हर मंजिल प्राप्त होगी जिसकी कामना आप करते हैं प्रणाम स्वर्ण भारत ।।

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