पीयूष ग्रुप की सफल कंपनियों में से एक जेम्स इनफिनस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना 2014 में हुई जिसके माध्यम से हमने इलेक्ट्रिकल मेकेनिकल सिविल कंस्ट्रक्शन के साथ रिन्यूअल एनर्जी में हाथ आजमाया जिसमे करीब करीब संतोष जनक सफलता मिली साथ जेम्स ग्रुप ने 2017 जून में लॉजिस्टिक क्षेत्र में कूद गई और जेम्स लॉजिस्टिक का निर्माण किया गया आज के समय मे भारत मे व्यवसाय स्थापित कर पाना जटिल हो गया है पर जटिलता को मात देना ही एन्त्रप्रेनुरशिप की पहचान है!

मात्र 5 लाख के निवेश के साथ जेम्स लॉजिस्टिक की शुरुवात हुई 3 जून 2017 को हालांकि पीयूष ग्रुप का यह पारिवारिक व्यवसाय है जो 1995 में श्री राम आसरे शुक्ल ने ट्रक ड्राइवर से खुद को ट्रक मालिक की श्रेणी में स्थापित किया और आज करीब 100 गाड़ियों का संचालन खुद के द्वारा कर रहें है जिसमे 10 गाड़ी का स्वामित्व खुद उनके पास है । पर इधर जब सर्विस लॉजिस्टिक की बात आये तो जेम्स ग्रुप के एमडी पीयूष पण्डित ने 7 महीनों में कम्पनी को एक करोड़ के ऊपर की कंपनी बनाने में सफलता प्राप्त की ।
पेश है मीडिया के सवालों के जवाब पीयूष पण्डित द्वारा

मीडिया :आप लॉजिस्टिक में क्यो आये जबकि आप अलग अलग व्यवसाय में खुद को स्थापित कर चुके हैं ।

पीयूष पण्डित : वैसे इस बिज़नेस में परिवारिक सदस्य कई अरसे से हैं मेरे बड़े भाई पिछले 3 दशक से इसी व्यवसाय को सफलता पूर्वक कर रहें है उनकी मेहनत कार्य के प्रति ईमानदारी निष्ठा देखकर ही मै किसी भी प्रकार का बिज़नेस कर पाने में सफल हूं उनके द्वारा बताई गयी बात व्यवसाय आगे बढाने में सहायक होती हैं दिल्ली के एक मित्र अरविंद शुक्ल जो कि अनुभवी हैं उनको साथ लेकर हमने आगे बढ़ने का प्रयास किया करीब 5 महीने के कार्य के बाद अरविंद शुक्ल कंपनी से दूर हो गए फलस्वरूप फिर से जेम्स लोजिस्टिक की ज़िमेदारी एकता सिंह गोलू शुक्ल और अष्टभुज तिवारी ने उठाई और कंपनी को 7 महीने में एक करोड़ के ऊपर पहुंचा दिया । आज लोजिस्टिक टीम में करीब 15 लोग लगातार व्यवसाय को आगे बढ़ाने में लगें हैं ।

मीडिया :इस वित्तीय वर्ष में क्या कार्य योजना है आपकी
पीयूष पण्डित : निश्चित ही लोजिस्टिक व्यवसाय का टर्नओवर अगले वित्तीय वर्ष में हम 100 करोड़ पार कर देंगे क्योकि इन सात महीने में जो सीखने को मिला है वह काफी काम आएगा ।

मीडिया : निवेश की क्या योजना है इस साल
पीयूष पण्डित : प्रारम्भिक निवेश कम्पनी द्वारा किया जा चुका है साथ ही बहुत से निवेशक द्वारा भी अप्रोच किया जा रहा है समय समय पर आपको जानकारी मिलती रहेगी ।

अगर दृढ़ इच्छा शक्ति है तो आप बिना पूंजी के भी व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं : पीयूष पण्डित

पढ़िए ये कहानी जो मुझे साहस देती है आगे बढ़ने हेतु ———–

उधार के लिए पैसे से ट्रक खरीद कर 2000 करोड़ की ट्रांसपोर्ट कंपनी बनाने वाले उद्यमी ।

एक 19 साल का लड़का अपने पिता की सलाह को नजरअंदाज करते हुए एक नए बिज़नेस क्षेत्र में कदम रखता है । इसी असंगठित क्षेत्र को अपने दूरदर्शी भरे निर्णयों एवं जोखिम उठाने की अद्भुत क्षमता के बलबूते भारत का नंबर एक लोजिस्टिक्स कंपनी के रूप में स्थापित कर देता है । एक नए व्यापार क्षेत्र में उतरने के अपने किशोर बेटे के निर्णय के बारे में एक पिता की चिंता को गलत साबित करते हुए , यह किशोर आज ट्रांसपोर्ट किंग बन चूका है , ऐसे दिलचस्प सफर को मुकाम तक पहुंचाने वाले उद्यमी का नाम है डॉ विजय संकेश्वर (Vijay Sankeshwar)।

उनके पिता को पता ही नहीं था कि उनके 1 9 वर्षीय बेटे के परिवहन कारोबार में प्रवेश किसी दिन उन्हें एक उद्योगपति बनवाएगा। विजय, जिन्होंने 1 9 76 में विजय परिवहन नाम की एक कंपनी शुरू की जिसमे शुरुआत में केवल एक ट्रक था लेकिन अब यह एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का रूप ले चुकी है और सालाना लगभग 2000 करोड़ का टर्नओवर होता है । विजय अब VRL लॉजिस्टिक्स (VRL Logistics) लिमिटेड के सीएमडी हैं तथा उनके बेटे आनंद भी अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बटा रहे ।

विजय ने अपने क़स्बे गडग जो कि उत्तर कर्नाटक के औद्योगिक नगर हुबली के पास स्तिथ है, में 1976 में एक ट्रक ख़रीदा। उस समय परिवहन क्षेत्र बहुत ही ज्यादा असंगठित था और सब लोग अपने हिसाब से लोजिस्टिक्स का काम देख रहे थे । इस नए क्षेत्र में विजय को अपार संभावनाए नजर आयी और आज लगभग 4500 वाहनों के साथ प्राइवेट क्षेत्र की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक कंपनी बना डाली ।

15,000 से अधिक कर्मचारियों के साथ, वीआरएल समूह परिवहन, कूरियर सेवा, प्रकाशन, पवन मिलों और हवाई चार्टर व्यवसाय में है।1976 में दो लाख कमाई करने वाले विजय ने अब एक उद्योग समूह खड़ा कर दिया है जिसमे केवल 300 करोड़ का तो VRL मीडिया हाउस ही है ।

यह विश्वास करना मुश्किल है कि उत्तर कर्नाटक के गडग में से इस विनम्र आदमी ने परिवार के पुश्तैनी व्यवसाय से कुछ अलग करते हुए एक नए क्षेत्र में क्रांति ला दी । 1976 में, उसने 1.20 लाख रुपये उधार लेकर एक ट्रक के साथ विजय परिवहन शुरू किया ।

अपने शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए विजय ने बताया कि

मैंने एक बड़ा जोखिम लिया तथा इस असंगठित क्षेत्र में मेरी किस्मत को आजमने की कोशिश करना मेरे लिए बहुत कठिन था। कई बार मुझे इस व्यापार में गंभीर नुकसान उठाना पड़ा और मेरे माता-पिता के साथ ही मेरी पत्नी मुझे पारिवारिक व्यवसाय करने के लिए कहते थे।

विजय अपने परिवार में सात भाइयों के बीच चौथी संतान था। उनका परिवार किताबों के प्रकाशन और मुद्रण कारोबार में था। उनके पिता ने आज से लगभग 90 साल पहले गडग में ही एक प्रकाशन हाउस खोला था और उनके परिवार का इस व्यापार में खासी पहचान थी । उनके पब्लिशिंग हाउस से कन्नड़ डिक्शनरी के साथ ही अन्य साहित्य एवं पत्रिकाए छपती थी ,अब भी वे हर वर्ष शब्दकोश की पांच से छह लाख प्रतियां प्रकाशित करते हैं, जो कि विजय के भाइयों द्वारा उस का संचालन किया जाता है ।
विजय के पिता भी यही चाहते थे कि वो उनका प्रकाशन का व्यापार देखे लेकिन विजय न तो कुछ और ही ठान रखा था । 16 साल की उम्र में उनके पिता ने उनको विजय प्रिंट हाउसनाम से एक प्रिंटिंग प्रेस बना के दी जिसमे उस वक्त दो कर्मचारी काम करते थे और एक प्रिंटिंग मशीन हुआ करती थी । इसी बीच उन्होंने अपनी प्रेस का आधुनिकीकरण करने के लिए लगभग एक लाख रुपये खर्च करके नयी मशीन लगवाई तथा इंटरनेशनल ब्रांड की पत्रिकाओं का मुद्रण भी शुरू कर दिया लेकिन वो हमेशा एक ऐसा बिज़नेस करने का प्लान बना रहे थे जिसमे शुरुआती निवेश दो लाख रुपये से जायदा न हो ।

अपनी रिसर्च के दौरान उन्होंने पाया कि ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में अपार संभावनाए है तथा काम निवेश में इस क्षेत्र में कार्य किया जा सकता है । उनका यह विचार रूपी बीज आज वट वृक्ष का रूप ले चूका है तथा हुबली के साथ ही बैंगलोर, बेलगावी और मैसूर में भी VRL के मुख्यालय है ।आठ भरी वाहनों के साथ उन्होंने विजयानन्द रोडलाइन्स के नाम से 1983 में कंपनी शुरू की और 1990 के अंत तक उन्होंने लगभग चार करोड़ रुपये का टर्नओवर कमा लिया ।

ट्रांसपोर्ट बिज़नेस में मिली सफलता के बाद उन्होंने कर्नाटक में कुरियर सर्विस शुरू करने का फैसला किया जो कि उनके ट्रांसपोर्ट बिज़नेस का ही पूरक उद्योग था । इसके कुछ सालों बाद उन्होंने पैसेंजर बस सर्विस का काम 4 बसों के साथ प्रारम्भ किया जो आज 75 रुट्स के साथ आठ राज्यों को कवर करता है और इनके बड़े में आज 400 से ज्यादा बस है ।

VRL ग्रुप आज कुरियर के साथ ही पार्सल , परिवहन एवं पैसेंजर सर्विस में नंबर वन बना हुआ है और विजय के नाम लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में भी दर्ज है । विजय की कंपनी के पास दुनिया में सबसे ज्यादा व्हीकल्स है जिनमे ट्रक , बस , कार , मिनी ट्रक तथा भारी वहां शामिल है ।

विजय के बेटे आनंद ने अगले तीन साल में अपना एयरलाइन ब्रांड खोलने का फैसला किया है तथा 1300 करोड़ के शुरुआती निवेश से उन्होंने काम करना शुरू कर दिया है । 16 साल की उम्र में एक प्रिंटिंग प्रेस चलाकर अपनी उद्यमी यात्रा शुरू करने वाले 66 साल की उम्र में विजय आज 2000 करोड़ की कंपनी के मालिक बन चुके है । उन्होंने अपनी उद्यम यात्रा में कई पड़ाव पर किये और लगातार जोखिम उठाने के बाद आज सफलता के नए आयाम स्थापित !

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