बाबा रामदेव पर दोहरी मुसीबत एक तरफ चंदन की लकड़ी तस्करी में फसें वही दूसरी ओर पीयूष पण्डित ने फर्जी बायोपिक को सार्वजनिक कर कोर्ट जाने की तैयारी

पीयूष पण्डित ने खोला बाबा रामदेव के खिलाफ मोर्चा पूरे देश मे मचा कोहराम

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नई दिल्ली :बाबा रामदेव अब ब्राह्मण समाज के साथ साथ कानूनी दाव पेंच में फसने वाले हैं एक तरफ चंदन की लकड़ी की तस्करी में उनको कोर्ट पहुचना पड़ रहा है वहीं पीयूष पण्डित ने उनकी फर्जी बायोपिक को सार्वजनिक कर दिया साथ ही कोर्ट में केस करने की तैयारी में हैं रामदेव-एक संघर्ष” धारावाहिक का विरोध क्यों???
मित्रों काफी दिनों से “रामदेव-एक संघर्ष” धारावाहिक बहुत ज्यादा चर्चा में है और बहुत जगह पर इसका विरोध हुआ है हालांकि मैं TV नहीं देखता फिर भी इस विरोध ने मेरी उत्सुकता को बढ़ा दिया और मैंने जानने का प्रयत्न किया कि इस धारावाहिक में ऐसा क्या है जिसके लिए विरोध हो रहा है??? तो आइए मेरे दृष्टिकोण से इस धारावाहिक को देखिए…
सबसे पहले इसकी कहानी जहां से शुरू होती है वहां से… भगवान श्री कृष्ण जी की मूर्ति पर पंचामृत या शहद से अभिषेक किया जा रहा है तो वहां एक बच्चा जो कि यादव है, अपने माता पिता के साथ पहुंचता है, जिसकी उम्र लगभग 5 से 6 वर्ष है।वहां पर गोवर्धन महाराज भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति का अभिषेक करते हैं और एक तरफ जा कर बैठ जाते हैं, जहां पर लड्डुओं का एक बड़ा सा थाल लाया जाता है। जिसको गोवर्धन महाराज थोड़ा-थोड़ा खाकर जनता में फेंकते हैं और जनता पागलों की तरह मिट्टी में पड़े उन लड्डुओं को उठाकर धन्य धन्य हो जाती है। तभी नजर हटती है और वह छोटा सा बच्चा भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के पास पहुंच जाता है और मूर्ति पर लगे हुए शहद या चरणामृत को चखता है तभी वहां गोवर्धन का एक चेला उसे गले से पकड़कर उठा लेता है, उसके बाद में उस बालक को पंचायत के अंदर पेड़ से बांध दिया जाता है और उसपर गंदा पानी फेंका जाता है और वहां आकर गोवर्धन अपने आप को ईश्वर का अंश बताता है, उस बच्चे को इसका दंड मिलना चाहिए यह कहता है। तब गांव के लोग कहते हैं कि इसे हजार कोड़े लगाए जाए, इसे मुंह काला करके घुमाया जाए, इसको मार दिया जाए लेकिन गोवर्धन उस परिवार को वहां से निकल जाने के लिए कहता है। उसकी गर्भवती माता के साथ और उस गर्भ में पल रहे बालक को शापित बताता है। गांव में कोई भी विरोध नहीं करता… मैंने इतनी ही कहानी देखी।
मुझे यह बताएं कि क्या यह हकीकत है??? क्या यादव समाज को कभी हमारे देश में मंदिर में नहीं जाने दिया जाता था??? क्या देश के ब्राह्मण आज भी प्रसाद को जूठा करके लोगों के अंदर फेंकते हैं??? क्या 6 साल के बच्चे को बांधकर सिर्फ मूर्ति छू जाने के लिए इतना कड़ा दंड कभी दिया गया है इतिहास में??? क्या जातिवाद पूरे देश के अंदर इतना खतरनाक है??? क्या इस देश की वर्ण व्यवस्था बेहद घातक है??? प्रश्नों के जवाब हमें अपने विवेक से लेने होंगे और साथ ही साथ उन भ्रष्ट नेताओं से भी जो इस धारावाहिक के मेगा प्रीमियर में दिल्ली में मौजूद थे और इस धारावाहिक की बड़ी तारीफ कर रहे थे! दुर्भाग्य से वह सब के सब भाजपा के नेता थे। अमित शाह जिसके कहे बिना नरेंद्र मोदी पैर भी नहीं हिलाते, अरुण जेटली जो देश की वित्त व्यवस्था की दूरी है और भोपाल गैस कांड में एंडरसन की तरफ से वकील था, रजत शर्मा जो कि एक रिपोर्टर है और भी बड़े-बड़े चेहरे वहां थे तो किसी ने विरोध क्यों नहीं किया और मूर्ख भक्तों से मेरा यह पूछना है कि क्या उनका बहिष्कार नहीं किया जा सकता, जो इस पूरे प्रकरण में सम्मिलित थे??? पूरे देश के अंदर ब्राह्मणों को इस तरह से पर्दे पर दिखाना क्या यह देश की वर्ण व्यवस्था का अपमान नहीं है??? क्या यादव को सब जगह ऐसे ही अपमानित किया जाता है??? क्या यह हम लोगों की एकता को खंडित करने का दुस्साहस नहीं है??? रामदेव मौन क्यों है???
इसकी वजह यह है की पूरी कहानी रामदेव ने खुद बताई है और रामदेव ने बयान दिया है कि इस पूरी कहानी के लिए मुझ से अच्छी तरह से सलाह ली गई है, तो सही कौन है और गलत कौन??? आप अंदाजा लगा लीजिए… मेरा दर्द यह है कि वहां पर पूरी की पूरी भाजपा बैठी थी कांग्रेस तो शुरु से ही देशद्रोही रही है लेकिन इसके आधार पर भाजपा को छूट किसने दी है??? फिर भी कई लोगों की भक्ति नहीं जा रही है। ना जाने इस देश का क्या हाल वो करना चाहते हैं लेकिन यदि अभी नहीं संभले तो वह होगा जो अब तक नहीं हुआ। इसलिए मेरा निवेदन है कि सावधान रहे सुरक्षित रहे. इस सीरियल पर मेरी जांज पड़ताल जरूर देखें

पीयूष पंडित
राष्ट्रीय अध्यक्ष
स्वर्ण भारत परिवार दिल्ली

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